निचली अदालत के इसी फैसले को राजपाल ने हाई कोर्ट में चुनौती दिया था। हाई कोर्ट में दोनों पक्ष के दलील सुनने के बाद न्यायमूर्ती राजीव सहाय की पीठ ने राजपाल को दोषी करार देते हुए तीन माह के लिए जेल भेजने का आदेश दिया। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया।
राजपाल के वकील ने अदालत के सामने 30 करोड़ की संपत्ति के दस्तावेज पेश करते हुए बाकी के रकम चुकाने के लिए एक माह का वक़्त मांगा। पीठ ने जनवरी तक मोहलत देने की बात कही लेकिन श्री नौरंग गोदावरी एंटरटेनमेंट की तरफ से पेश वकील करण लुथरा और एसके शर्मा ने कहा कि उन्हें कई बार मोहलत दी जा चुकी है। ऐसे में अब उन्हें मोहलत नहीं जेल भेज देना चाहिए।

क्या है पूरा मामला?
साल 2010 में राजपाल ने ‘अता पता लापता’ फ़िल्म बनाई थी। फ़िल्म के लिए उन्होंने कई व्यवसायीयों से कर्ज लिया था। जिसे राजपाल अभी तक नहीं चुका पाया है। राजपाल ने जो चेक व्यवसायीयों को दिया था वो भी बाउंस हो गया था। चेक बाउंस होने का मामला श्री नौरंग एंटरटेनमेंट लिमिटेड ने राजपाल के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया। इसके बाद एक के बाद एक सात मामले राजपाल के खिलाप दर्ज किए गए।
दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट ने धोखाधड़ी समेत सात मामले में उन्हें नोटिश भेजा, लेकिन राजपाल अदालत में पेश नही हुए। अदालत कड़े रुख अपनाते हुए 2013 में उन्हें 10 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।।
कड़कड़डूमा कोर्ट ने साल अप्रैल 2018 में राजपाल को इस मामलें में छः साल की कैद समेत 10.40 करोड़ जुर्माना भरने की सजा सुनाई। निचली अदालत के फैसले को उन्होंने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने राजपाल को जुर्माना की रकम को तीन तीन माह में किश्तों में चुकाने को कहा। जिसके बाद उन्होंने 2.40 करोड़ चुका भी दिया था। इसके बाद 30 नवंबर को दो करोड़ जमा करना था। ऐसा नहीं करने के बाद उन्हें जेल जाना पड़ा।

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