छह साल के हुए ‘आप’

 

आज यानी 26 नवंबर को आम आदमी पार्टी अपने छठे स्थापना दिवस माना रही है। पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल सोमवार सुबह ट्वीट किया- ‘छह साल पहले आज ही के दिन आम आदमी पार्टी की राजनीतिक यात्रा शुरू हुई। निःस्वार्थ भाव से कम करने वाले लाखों कार्यकर्ता और शुभचिंतकों के दम पर तमाम बाधाओं के बावजूद भारत को भ्रष्टाचार,  साम्प्रदायिकता और जातिवाद के जहर से मुक्ति करने की दिशा में यह राजनीतिक क्रांति आगे बढ़ रही है’।

 

केजरीवाल ने अगले ट्वीट में लिखा है -आम आदमी पार्टी के जन्म दिवस के अवसर पर गर्व से कहो कि हम आपीए हैं “आप” में होना आप को लगातार देश के प्रति आपकी जिम्मेदारी का एहसास दिलाता है। यदि आप “आप” में हैं, तो इसका मतलब आपने अपना जीवन देश की सेवा में समर्पित कर दिया।



आम आदमी और केजरीवाल।

   सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के साथ अरविन्द केजरीवाल लोकपाल के लिए दिल्ली के रामलीला मैदान में आंदोलन खड़ा किया था। आंदोलन इतनी तगड़ी थी कि इसकी वजह से केन्द्र सरकार भी हिल गई थी। कभी भी रणनीति में जाने की बात कहने वाले केजरीवाल ने अचानक राजनीति में जाने का मन बना लिया। इस वजह से उनके और अन्ना के बीच में खाई बन गई। जो अभी तक भर नही पाई है। केजरीवाल ने आंदोलन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहे कुछ कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर 24 नवंबर 2012 को जंतर-मंतर से राजनीतिक दल बनाने की घोषणा की। 26 नवंबर 2012 को राजनीतिक दल का एलान किया। आम आदमी को ध्यान में रखकर केजरीवाल ने पार्टी का नाम भी आम आदमी पार्टी ही रखा।

 कांग्रेस को कोसने वाला केजरीवाल कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई

  पहली बार 2013 में विधानसभा चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी को 70 में से 28 सीटें मिली। लेकिन बहुमत से दूर रह गई।  हमेशा कांग्रेस को अपना धूर विरोधी बताने वाले केजरीवाल ने कांग्रेस के ही साथ मिलकर सरकार बनाई। केजरीवाल सरकार ने विधानसभा सदन में जन लोकपाल विधेयक पारित किया। लेकिन विधेयक को समर्थन नहीं मिला। इसके चलते केजरीवाल ने मात्र 49 सरकार चलने के बाद इस्तीफा दे दिया। हालांकि फिर से 2015 में विधानसभा चुनाव में केजरीवाल की पार्टी को रिकॉर्ड जीत मिली। इस बार 70 सीटों में से 67 पर जीत दर्ज की।

कैसा रहा छह सालों के सफर

   अगर कहा जाए कि आम आदमी पार्टी की सफर खास अच्छी नहीं रही तो कोई गलत नहीं हैं। पार्टी की नींव रखने वाले कई नेता पार्टी से बाहर किए जा चुके हैं या फिर खुद बाहर हो गए हैं। बात कुमार विश्वास, योगेंद्र यादव, प्रशांत, कपिल मिश्रा या फिर किरण बेदी का हो। ये वो लोग है जिन्होंने पार्टी को खड़ा करने में अहम योगदान दिया था। हालांकि अच्छी खबर यह है कि पार्टी पंजाब के साथ-साथ हरियाणा में भी अच्छी पकड़ बना रही हैं।

 हमेशा विवादों में रही केजरीवाल सरकार

  यूं कहें कि विवादों का दूसरा नाम केजरीवाल सरकार हैं तो कोई शक नही होनी चाहिए। हाल ही में सिग्नेचर ब्रिज के उदघाटन समारोह में भी दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी को मंच से धक्का देने पर जमकर बबाल हुआ था। इस से पहले मुख्य सचिव अंशु प्रकाश से भी मारपीट के मामलें में दिल्ली हाई ने केजरीवाल सरकार को तलब किया था। एक बार तो चुनाव आयोग ने लाभ के पद पर होने का हवाला देते हुए “आप” की 21 विधायक को अयोग्य करार दिया था। हालांकि बाद में हाई कोर्ट ने सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया।

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