आगामी लोकसभा चुनाव में बिहार में सीट बंटवारे के लेकर चल रही अटकलें समाप्त हो गया। शुक्रवार को जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार तथा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के बीच बैठक के बाद खुद नीतीश और शाह ने बराबर-बराबर सीटों पर चुनाव लड़ने का एलान किया। इस से पागल कयास लगाया जा रहा था कि पहले की तरह ही बड़े भाई तथा छोटे भाई वाली कहानी दोहराई जाएगी। लेकिन पिछली बार लोकसभा चुनाव में अपनी खस्ता हालत देख जेडीयू ने भाजपा के बराबर वाली फॉर्मूला मान ली। शायद भाजपा को भी इस बात का अंदाजा होगा कि बिहार में जेडीयू के बिना सक्रिय रहना आसान नही हैं।
जेडीयू-बीजेपी की तो बल्ले-बल्ले फिर पासवान और कुशवाहा का क्या होगा?
बिहार में लोकसभा की कुल 40 सीटें हैं। जिसमें से 22 भाजपा तथा 2 जेडीयू के पास हैं तो अभी के 6 सीटों वाली लोजपा अपनी दावेदारी कैसे छोड़ सकती है। वहीं 3 सीट के साथ रालोसपा भी अपना दमखम दिखाने को तैयार है। अगर जेडीयू तथा भाजपा 16-16 सीटों पर चुनाव लड़ेगी तो बचें 8 सीटों में से कितने सीटें किसके पाले में आएंगे।
आरजेडी नेता तेजस्वी से मिलें रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा
सीट बटवारें को लेकर चल रही घमासान के बीच कुशवाहा को तेजस्वी से मिलन कुछ और ही संकेत दे रहा हैं। हालांकि इस मामलें पर कुशवाहा ने अभी तक खुल कर कुछ नहीं कहा है। उधर रामविलास पासवान के बेटा चिराग पासवान ने कहा कि अमित शाह सम्मान जनक सीटें देने की बात कही हैं।

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